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एक दिन का पुण्य, मधुर कहानी,

 

*एक दिन का पुण्य*


*एक महिला घर से 2 केले लेकर  निकली। और तलास थी एक गाय की*


*थोड़ी दूर जाते ही उसे गाय मिल गई और वो जल्दी से गाय के निकट गई।।*


*गाय ने केला देखकर मुँह मोड़ लिया..*


*महिला ने गाय के सामने जाकर फिर उसके मुँह मे केला देना चाहा लेकिन गाय ने केला नहीं खाया,*






 *पर महिला केला खिलाने के लिये पीछे ही पड़ी थी। जब महिला नहीं मानी, तो गाय सींग मारने को हुई।*


 *महिला डरकर बिना केला खिलाये भागी चली गयी।*


*महिला के जाने के बाद पास खडे साँड ने गाय से पूछा-"वह इतने 'प्यार से' केला खिला रही थी, आपने केला  खाया क्यों नही और उल्टा उसे डराकर भगा भी दिया।"*


*गाय बोली "प्यार नहीं मजबूरी थी। आज एकादशी है, महिला मुझे केला खिलाकर पुण्य कमाना चाहती है।*


 *वैसे यह मुझे कभी  पूछती भी नही ह ,*

 *गलती से में उसके मकान के आगे चली भी जाती हूँ तो डंडा लेकर मारने को दौड़ती है।*


*और आज वो जबरदस्ती खिला रही थी*


*"प्रेम से सूखी रोटी भी मिल जाये, तो अमृत तुल्य है।*


*जो केवल अपना भला चाहता है, वह दुर्योधन है, जो अपनों का भला चाहता है,वह युधिष्ठिर है*


*और जो सबका भला चाहता है वह श्रीकृष्ण है।*


*अर्थात कर्म के साथ-साथ भावनाएँ भी महत्व रखती हैं !*

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*सुध सात्विक प्रेम अपना कार्य का आधार ह।।*

*निराशा के इस माहौल में बस कहानियों से प्यार ह।*

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*जय श्री राम*

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