*🚩आखिरी समय के बोल🚩*
*एक सज्जन ने तो
ता पाल रखा था और उस से बहुत स्नेह करते थे,एक दिन एक बिल्ली उस तोते पर झपटी और तोता उठा कर ले गई । वो सज्जन रोने लगे तो लोगो ने कहा: महाश्य आप क्यों रोते हो?*
*हम आपको दूसरा तोता ला देते हैं तब वो सज्जन बोले: मैं तोते के दूर जाने पर नही रो रहा हूं।*
*पूछा गया: फिर क्यों रो रहे हो?*
*कहने लगे: दरअसल बात ये है कि मैंने उस तोते को रामायण की चौपाइयां सिखा रखी थी वो सारा दिन चौपाइयां बोलता रहता था*
*आज जब बिल्ली उस पर झपटी तो वो चौपाइयाँ भूल गया और टाएं टाएं करने लगा ।*
*अब मुझे ये फिक्र खाए जा रही है कि रामायण तो मैं भी पढ़ता हूँ । लेकिन जब यमराज मुझ पर झपटेगा, तब क्या मालूम मेरी जिव्हा से रामायण की चौपाइयाँ निकलेंगी या तोते की तरह टाएं-टाएं निकलेगी।*
*इसीलिए महापुरुष कहते हैं । कि विचार-विचार कर तत्त्वज्ञान और रुपध्यान इतना पक्का कर लो । कि हर समय, हर जगह भगवान के सिवाय और कुछ दिखाई न दे,*
*हर समय जिव्हा पर राधे-राधे या राम-राम चलता रहे। अन्तिम समय ऐसा न हो हम भी तोते की तरह भगवान के नाम की जगह हाय-हाय करने लगे,*
*नानक जी के पास सत्संग में एक छोटा लड़का प्रतिदिन आकर बैठ जाता था।*
*एक दिन नानक जी ने उससे पूछाः-"बेटा, कार्तिक के महीने में सुबह इतनी जल्दी आ जाता है, क्यों?"*
*वह छोटा लड़का बोलाः- "महाराज,क्या पता मौत कब आकर लेकर चली जाये?"*
*नानक जीः-"इतनी छोटी-सी उम्र का लड़का,अभी तुझे मौत थोड़े मारेगी? अभी तो तू जवान होगा, बूढ़ा होगा,फिर मौत आयेगी।*
*
*लड़का बोलाः- "महाराज,मेरी माँ चूल्हा जला रही थी, बड़ी-बड़ी लकड़ियों को आगने नहीं पकड़ा तो फिर उन्होंने मुझसे छोटी-छोटी लकड़ियाँ मँगवायी।*
*माँ ने छोटी-छोटी लकड़ियाँ डालीं तो आग ने उन्हें जल्दी पकड़ लिया। इसी तरह हो सकता है मुझे भी छोटी उम्र में ही मृत्यु पकड़ ले, इसीलिए मैं अभी से सत्संग में आ जाता हूँ।"*
*इसलिए जल्दी से परमात्मा से प्रेम करके जीवन सफल बनाने का जतन करलो।। इन स्वांसो से बडा दगाबाज और कोइ नही है,*
*कहीं ऐसा न हो कि बाद मे पश्चताप का ही मौका न मिले।।*
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*🙏जय श्री राम - जय श्री कृष्णा🙏*
सबको राम राम जी


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