लोगों का काम है कहना, मधुर कहानियाँ, Madhur kahaniyaan
*लोगों का काम है कहना*
*एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया।*
*पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!*
*एक आई और कहा- अहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया।*
*पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।*
*पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली...*
*उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया।*
*दूसरी बोली- साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई।*
*अभी रोष नहीं गया, तकिया फेंक दिया।*
*तीसरी बोली- बाबा! यह तो पनघट है, यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी,*
*बोलती ही रहेंगी, उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे*
*तो साधना कब करोगे?*
*तब एक चौथी पनीहारिन आई और बहुत ही सुन्दर और अद्भुत बात कही-*
*क्षमा करना बाबा, लेकिन हमको लगता है तूमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा। अभी तक वहीं का वहीं बने हुए हो।*
*दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे, तुम जैसे भी हो हरिनाम लेते रहो। सच तो केवल भगवान ही है, बाकी सब पाखंड*
*दुनिया का तो काम ही है कहना।*
*आप ऊपर देखकर चलोगे तो कहेंगे...*
*अभिमानी हो गए हैं।*
*नीचे देखोगे तो कहेंगे...*
*किसी के सामने देखते ही नहीं।*
*आंखे बंद करोगे तो कहेंगे...*
*ध्यान का नाटक कर रहा है।*
*चारो ओर देखोगे तो कहेंगे कि...*
*निगाह का ठिकाना नहीं। निगाह घूमती ही रहती है।*
*और जब अंत में परेशान होकर आंख फोड़ लोगे तो कहेगी कि...*
*किया हुआ भोगना ही पड़ता है।*
*ईश्वर को राजी करना आसान है,*
*लेकिन संसार को राजी करना असंभव है..*
*इसलिए दुनिया को छोड़ो और बस श्रीराम को भजो।*
*काम तो श्रीराम ही आयेंगे।*
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*🙏🏻बोलिये सियावर श्री रामचंद जी की जय🙏*
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